मित्र कीटों का भण्डारण

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मित्र कीटों का भण्डारण

जैविक सदस्यों का भण्डारण :- प्रत्येक जैविक सदस्य की मांग एक दूसरे से भिन्न होती है एवं इनकी मांग किट प्रकोप शुरू होने पर होती है। अतः व्यावसायिक रूप से मांग की पूर्ति के लिए या तो मांग के समय इनकी पालन पोषण की इकाई बढ़ा की जाये या फिर साल भर इनका पालन पोषण किया जाये। जैविक सदस्यों का भण्डारण इस समस्या को हल कर सकता है लेकिन जैविक सदस्य जैसे परजीव्याभ एवं परभक्षी का भण्डारण सूक्ष्म जीवों एवं मूत्र कृमि की तुलना में बहुत कम समय के लिए किया जा सकता है। फिर इनके भण्डारण में प्रकाश, सापेक्षिक सांद्रता एवं तापक्रम बहुत महत्वपूर्ण है, जो कि प्रत्येक जैविक सदस्य के लिये अलग-अलग है। साइनोनाइकस ग्रैन्डिस म्युलसेन्ट को १८-२० डिग्री सेंटीग्रेड तापक्रम पर ५ महीने के लिये भण्डारित किया जा सकता है। जिसमें वह ५०-१००% तक जिन्दा रहता है। इसी कारण परभक्षी मिज एफिडोलेटस एफ़िडिमाइजा को १ सेंटीग्रेट तापक्रम पर दो महीने तक ९०% तक जिन्दा रखा जा सकता है जबकि ५ डिग्री सेंटीग्रेट तापक्रम पर १० दिन के लिये ही भण्डारित कर सकते हैं। जो जैविक सदस्य कुछ समय के लिये निष्क्रिय अवस्था में चले जाते हैं उनका भण्डारण ज्यादा समय के लिये किया जा सकता है। जैसे डायापास में रहने वाले काइपोपर्ला कार्निया के प्रौढ़ को ५ डिग्री सेंटीग्रेड तापक्रम पर ३१ सप्ताह के लिये बहुत कम मृत्यु दर पर भण्डारित कर सकते हैं।
जैविक सदस्यों को अन्यत्र भेजने के लिये जरुरी है कि उनकी पैकिंग सही तरीके से हो एवं उसमें तापक्रम व नमी सामान्य स्तर पर बनी रहे जिससे जैविक सदस्य जिन्दा रह सकें। नमी बढ़ाने के लिये नामयुक्त नम या पानी सोख भी रख सकते हैं। पैकिंग को गर्म रखने के लिये गर्म पानी कि बोतल या गर्म करने वाले विशेष प्रकार के रसायन प्रयोग किये जा सकते हैं। साथ ही पैंकिंग के अंदर मित्र कीटों के भोजन के लिये शहद इत्यादि रखे जा सकते हैं जो कि कीटों के आकस्मिक निकलने पर उनको भोजन के काम आते हैं। जिससे वे ज्यादा समय तक जीवित रह सकते हैं एवं बच्चा पैदा करने कि दर भी बढ़ जाती है।
जैविक सदस्यों को छोड़ने का तरीका :- जैविक सदस्यों को खेतों में छोड़ने से पूर्व यह जान लेना आवश्यक है कि सम्बंधित परपोषी कीट अवस्था खेत में उपलब्ध है या नहीं। उदाहरण के लिये ट्राइकोग्रामा जातियां एंड परजीवी कीट है, यह केवल पुष्प कीट के अण्डों पर ही निर्भर होती है। साथ ही इनका जीवन पोष्य कीटों कि तुलना में बहुत छोटा होता है। अतः यदि उचित मिलान ( सिन्कोनाइजेशन ) नहीं हुआ तो मोचन असफल हो जाता है। दूसरी तरफ पोष्य कीटों का अण्ड देने का समय अलग-अलग जनसंख्या के कारण ३-४ सप्ताह तक चलता है। जबकि ट्राईकोग्रामा प्रौढ़ कुछ दिन तक ही जीवित रहते हैं अतः इनको निश्चित अवधि के अंतर पर छोड़ते रहना चाहिए। सुंडी परजीवी के लिये परपोषी कीट कि सुंडियों एवं शंखिका होने अनिवार्य हैं। मित्र कीटों कि क्रियाशीलता को बढ़ाने के लिये उनकी निश्चित संख्या को कई अलग-अलग जगह पर छोड़ते हैं; जैसे- ट्राईकोग्रामा की प्रति हैक्टर निश्चित संख्या का ४०-४२ स्थानों पर ट्राईकोकार्ड की प्रति हैक्टर निश्चित संख्या का ४०-४२ स्थानों पर ट्राईकोकार्ड के द्वारा मोचित करते हैं जिससे वह परपोषी तक आसानी से पहुंच सके।
उत्पादक मूल्यांकन :- मोचित जैविक सदस्यों द्वारा परपोषी कीटों का कितना नियंत्रण होता है इसका मूल्यांकन अवश्य करना है क्योंकि प्रक्षेप स्तर में जैविक सदस्यों की कार्यक्षमता छोड़े गए सदस्य की जाति एवं प्रभेद, मोचित संख्या, मोचन अवस्थाओं से मिलान पर निर्भर करना है। इसी प्रकार परजीव्याभ एवं परभक्षी का प्रभाव किसी फसल में मोचन से पूर्व एवं मोचन के बाद परपोषी कीटों की संख्या पर सीधे पड़ता है। जैविक महत्वपूर्ण भागेदारी अदा करते हैं। मोचित सदस्यों के मूल्यांकन की आर्थिक गणना के लिए आवश्यकता इस बात की होगी कि छोड़े गये जैविक सदस्यों की कीमत में कितना कीट नुकसान कम हो सका एवं अन्य नियंत्रण की विधाओं में प्रतियोगी सिध्द हुआ या नहीं।

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