जीव विज्ञान (Biology)

पशुओं के मुख्य आतंरिक व बाह्य परजीवी रोग
July 9, 2018

जीव विज्ञान (Biology)

जीव विज्ञान (Biology), विज्ञान की एक शाखा है, जिसके अन्तर्गत जीवधारियों का अध्ययन किया जाता है। जीव विज्ञान (Biology) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम लैमार्क एवं ट्रेविरेनस ने सन १८०२ में किया था। जीव विज्ञान को विज्ञान की एक शाखा के रूप में अरस्तु ने स्थापित किया। अतः अरस्तु को जीव विज्ञान का जनक भी कहते हैं।
अरस्तु को जंतु विज्ञान का भी जनक कहते हैं। जंतुओं का अध्ययन जंतु विज्ञान(Zoology), पादपों का अध्ययन वनस्पति विज्ञान(Botany) तथा सूक्ष्मजीवों का अध्ययन सूक्ष्मजीव विज्ञान(Microbiology) के अन्तर्गत किया जाता है।
कोशिका एवं कोशिकांग
सभी जीवधारियों का शरीर या तो एककोशिकीय, जैसे- जीवाणु, प्रोटोजाआ या बहुकोशिकीय, जैसे अधिकांश पादप एवं जंतु होता है।
शरीर की इन संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाइयों को कोशिका(Cell) कहते हैं।
1. हरितलवक(Chloroplast) प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण|
2. माइटोकॉन्ड्रिया(Mitochondria) कोशिकीय श्वसन द्वारा ATP का निर्माण|
3. गॉल्जीकाय(Golgi Body) शुक्राणु के एक्रोसोम का निर्माण, हार्मोन स्त्रावण, पदार्थ का संचय एवं स्थानान्तरण|
4. कोशिका भित्ति(Cell Wall) कोशिका की बाह्य आघातों से सुरक्षा करना,कैल्सियम व मैग्नीशियम पेक्टेट की बानी मध्य पटलिका कोशिकाओं के बीच सीमेंट का कार्य करती है।
5. जीवद्रव(Protoplasm) जीवन की भौतिक आधारशिला।
6. क्वांटासोम(Quantasome) प्रकाश-संश्लेषण की इकाई।
7. केन्द्रक(Nucleus) कोशिका नियन्त्रक।
8. केन्द्रिका(Nucleolus) RNA तथा राइबोसोम का संश्लेषण|
9. गुण सूत्र(Chromosome) जननिक लक्षणों के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरण|
DNA एवं RNA
डीएनए की अधिकांश मात्रा केन्द्रक में पाई जाती है ओर इसकी कुछ मात्रा माइट्रोकाण्ड्रिया व हरित लवक में भी मिलती है। यह सभी प्रकार की आनुवांशिक क्रियाओं को संचालित करती है। जीन इसकी इकाई है तथा यश प्रोटीन संश्लेषण डीएनए से ही होता है, ये तीन प्रकार के होते हैं-
t-RNA, r-RNA, m-RNA
यह केन्द्रक एवं कोशिका द्रव्य दोनों में पाया जाता है।
मानव शरीर – विज्ञान :-
मानव के शरीर में विभिन्न प्रकार के अंत-तंत्र, जैसे-पाचन, श्वसन, परिसंचरण, उत्सर्जन, तंत्रिका तथा अन्तः स्त्रावी तंत्र उपस्थिति होते हैं।
– जीव को वृध्दि, विकास व अनुरक्षण हेतु तथा सभी जैविक प्रक्रियाओं के संचालन हेतु पोषण पदार्थो के अधिग्रहण को पोषण(Nutrition) कहते हैं। इस प्रक्रिया में जीव पोषण पदार्थो का उपयोग कर ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
– पोषक पदार्थ वे पदार्थ है, जो जीवन के लिए आवश्यक जैविक कार्यों ले संचालन हेतु उत्तरदायी होते हैं; जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन्स आदि।
जीवाणु जनित प्रमुख मानव रोग :-
1. निमोनिया – डिप्लोकोकस न्युमोनी – फेफड़े
2. मियादी बुखार (टायफाइड) – सालमोनेला टाइफी – आँत या आहारनाल
3. कुष्ठ रोग – माइकोबैक्टीरियम लेप्री – त्वचा तथा तान्त्रिकाएँ
4. हैजा – विब्रिओ कोलेरी – आँत या आहारनाल
5. काली खाँसी – बैसिलस परट्यूसिस – श्वसन तंत्र
6. प्लेग – पास्टयूरेला पेस्टिस – बगलें या काँखे, फेफड़ें, लाल रुधिर कणिकाएँ
प्रोटोजोआ जनित प्रमुख मानव रोग :-
1. अमीबियेसिस – एन्टीअमीबा सिटोलिटिका – संदूषित जल व भोजन द्वारा
2. मलेरिया – प्लाज्मोडियम जातियाँ – संक्रमित मादा एनॉफिलीज मच्छर कि काटने से
3. अफ़्रीकी निद्रा रोग या गैम्बियन ज्वर – ट्रीपैनोसोमा गैम्बियन्स – ग्लोसीना पैल्पेलिस के काटने से
4. चागा रोग – ट्रीपैनोसोमा क्रूजी – ग्लोसीना पैल्पेलिस के काटने से
5. काला- अजार – लीशमानिडा डोनोवानी – फ्लीबोटेमाय या बालू मक्खी के काटने से
6. अतिसार – जिआर्डिया लैम्बलिया – संदूषित जल व भोजन
7. ल्यूकोरिया – ट्राइकोमोनस वैजिनेलिस – लैंगिक सम्बन्ध
जैव प्रौद्योगिकी :-
1. जैव प्रौद्योगिकी जीव विज्ञान कि वह शाखा है, जिसमें सूक्ष्मजीवों का अन्य जीवों का प्रयोग कर पदार्थ का निर्माण किया जाता है रोगों का निदान किया जाता है।
2. जैव प्रौद्योगिकी के द्वारा मानव इन्सुलिन का उत्पादन किया जाता है, जिसे मधुमेह रोगियों को उपलब्ध कराया जाता है।
3. जैव उर्वरक वायुमण्डल की नाइट्रोजन को ग्रहण करके पौधों को प्रदान करते हैं, उदाहरण – राइजोबियम, एजोला, स्वतन्त्र जीवाणु।
जीवाणु तथा दुग्ध उत्पाद :-
1. बटर मिल्क – लैक्टोबैसिलस वल्गेरिकस
2. योगहर्ट – लैक्टोबैसिलस वल्गेरिकस तथा स्ट्रोष्टोकोकस थर्मोफिलस
3. दही – स्ट्रेप्टोकोकस लैक्टिक तथा लैक्टोबैसिलस
4. पनीर – लैक्टोबैसिलस लैक्टिव तथा स्ट्रेप्टोकोकस क्रिमोरिस

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *