अनाज भंडारों एवं मच्छरों की इल्ली के लिए कीटनाशक

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अनाज भंडारों एवं मच्छरों की इल्ली के लिए कीटनाशक

एक्टिलिक (पिरिमिफॉस-मिथईल ५०% ई.सी.)
अनाज भंडारों एवं मच्छरों की इल्ली के लिए कीटनाशक
परिमिफॉसमिथाइल बहुत प्रकार के कीटों को नियंत्रण करने के लिए कीटनाशक है जो आर्गेनोफॉस्फोरस ग्रुप का है। यह अनाज भंडारों में होने वाले विभिन्न कीटों जैसे बीटूल, सुंडो, पतंगे व माइट को मारता है, उन विभिन्न किस्म के कीटों को भी जिन पर कि अब मैलाथायान असरकारक नहीं। इसका असर शीघ्र होने के साथ ही छोटे एवं बड़े सभी बढ़व-स्थितियों पर होता है। अक्रिय सतहों जैसी बोरी, लकड़ी,कपड़ा, पक्के गोदाम इत्यादि पर इसका अधिक समय तक असर रहता है। यह एनोफिलिस, क्यूलेक्स एवं एसिड आदि के मच्छरों के नियंत्रण करने में सक्षम है।
उपयोग निर्देश :-
गोदामों को प्रारम्भिक संक्रमण रहित करने के लिए,आवश्यक मात्रा पानी में मिलाकर दीवारों एवं फर्श पर ठीक से छीड़के: पर होल सतहों पर बहे नहीं। छिड़काने के लिए नैपसक यन्त्र इस्तेमाल करें। बोरो के ढेर लगाते समय हर सतह पर छिड़के। यदि ऐसा किया जा सके तो ‘केपिंग’ उपचार करें जिसमें ढेर ज़माने से पहले फर्श तथा ज़माने के बाद ढेर की चारों दीवारों एवं ऊपर की सतह पर छिड़कें। हर सतह पर छिड़काव करने से कीटों पर सुरक्षा अधिक समय तक के लिए होती है। ‘केपिंग’ उपचार ०.१५ ग्राम सक्रिय प्रति वर्गमीटर जमाव के हिसाब से हर १५-३० दिन के अंदर से या आवश्यकतानुसार करें।
मच्छरों की इल्ली :-
आवश्यक मात्रा में कीटनाशक पानी में मिलाकर संक्रमित सतहों पर नैपसेक छिड़काव यंत्र जिसमें ०.६२(स्वाम्पसर) सनीली जमीन का टुकड़ा(मार्शेस), रांजीले पानी संग्रह टेंक, नालियां एवं संग्रहित बगैर पीने का पानी घर में उपयोग के लिए,में उपयोग करें।
सावधानियाँ :-
1. त्वचा व आंखों में उचर कर चले जाने पर, तुरन्त अच्छी तरह धोयें।
2. बंद जगहों में छिड़काव करते समय सादा उस्ट मास्क पहिनें। धूल में काम न करें।
3. हाथ एवं खुली त्वचा को खाने के पहिले एवं काम के बाद धोयें।
4. चावल के खेतों, पोखरों एवं पानी-स्त्रोतों इत्यादि को प्रदूषित न होने दें।
5. पिरिमिफॉसमिथाइल एक आर्गेनोफास्फोरस कीटनाशक है। जिन लोगों को डाक्टरी सलाह इस प्रकार न करने की दी गई हो, ये इसका इस्तेमाल न करें।
6. गाढ़े घोल को बरतते समय प्रतिबंधक चश्मा व दस्ताने पहिने।
विष-बाधा के लक्षण :-
जी-मचलाना, सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी एवं उल्टियां।
प्राथमिक उपचार :-
पेट में चला जाने पर उल्टियां करायें एवं डॉक्टर बुलायें।
विषरोधक चिकित्सा :-
एट्रोपिन १-४ मिलीग्राम इंट्रामस्कूलर इंजेक्शन, उसके बाद २ मिली.ग्राम प्रति ३० मिनट के अंदर से। इसके बाद १-२ ग्राम २ पी.एम. को अन्तः शिरा में १० सी.सी आसवन पानी में घोलकर १०-१५ मिनट लगते हुए दें।
संग्रह :-
1. कीटनाशक को मूल डिब्बे में ही अलग कमरे में रखे जहां कि अन्य प्रकार का समान न रखा हो। तादाद के हिसाब से कमरे का ताला बंद रखें।
2. कमरे/स्थान जहां कीटनाशक रखा जाये वे ठीक से बने हुए, सूखे ठन्डे,हवादार, ढके हुए, काफी जगह वाले हों।
खाली डिब्बे, यंत्रो की धुलाई व घासनी एवं बचा हुआ माल फेंकना :-
1. डिब्बों को तोड़कर निजी स्थान पर गाढ़ें।
2. डिब्बों को अन्य उपयोग से रोकने के लिए बाहर न छोड़ें।
3. डिब्बे एवं धुलाई का पानी एवं बचा हुआ माल इस सुरक्षित तरीके से फेंके कि वातावरण व पानी प्रदूषित न हो।

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